९.मधुर गीतों के रचैता-वाली
अभी-अभी तमिल फिल्मी गीतों में अपनी ख़ास मधुरता के लिए प्रसिद्ध वाली को काव्य क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए १ लाख रुपय का पुरस्कार मिला है.तमिल फिल्मी गीतों में एम् जी आर की लोकप्रियता में वाली के गीतों का भी योगदान है और वर्तमान में वे वरिष्ठ गीतकार हैं और फिल्मों के लिए लिखते रहे हैं.कुझे उनसे मिलने और बात करने का सौभाग्य श्री ते एस के कन्नन जो हिंदी तमिल संस्कृत से अच्छे विद्वान हैं,के द्वारा आयोजित हिंदी तमिल मधुर मिलन समारोह,चेन्नई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कविता सम्मलेन सहित एक-दो आयोजनों में हुआ.उनके संभ्रांत व्यवहार परिधान,देदीप्यमान चेहरा,उसपर सिन्दूर का तिलक और लम्बी खिचड़ी दाढ़ी,उन्हें गरिमा प्रदान करते हैं.मेरा परिचय उनसे हिंदी कवी के रूप में कराया गया.टुकड़ों-टुकड़ों में उनसे तमिल समकालीन कविता पर चर्चा भी हुई.आगे चल कर ज्यात हुआ की वे श्रीरंगम के हैं और वाली मित्रों के द्वारा दिया गया नाम है.वाली याने रामायण के पात्र बाली-सुग्रीव वाले बाली जो तमिल उचारण में वाली है.अमूमन हिंदी में बाली नाम नहीं के बराबर है शायद भगवान् राम के विरोधी होने के कारण रावण,कुम्भकरण,बाली,अहिरावन आदि नाम हिंदी क्षेत्र में नहीं मिलते हैं.यह नाम मित्रों ने वाली के गुणों को देखते हुए उसपर रिदम बिठाते हुए उन्हें दे दिया.वाली के प्रति मेरे मन में जिस विशेष कारण से लगाओ है वह है उन्होंने भी त्रिची से पहले पहल तमिल में हस्तलिखित पत्रिका प्रकाशित किया था और संवेदना के इसी धराधर पर मैं उनसे विशेष जुडाव महसूस करता हूँ क्योंकि चेन्नई से मैंने भी पहले पहल हस्तलिखित पत्रिका कागज़ का प्रकाशन किया था.मुझा भी तमिलनाडु में जो थोड़ी बहुत प्रसिद्धि मिली वह भी जीतों के कारण ही.हालाकि वाली हिंदी जानने वालों के बीच उतने जानेजाते नहीं हैं जितना की जाना जाना चाहिए.उनके अद्भुत सबध संयोजन कोमल भाव और ताजगी भरे उपमान अदभुत हैं.अभी तमिल में उनके जीवन पे आधारित सीरियल काफी लोकप्रिय हुआ है.पुरस्कार पर कागज़ परिवार की बधाई.
ईश्वर करुण,
चेन्नई.

मेरे ब्लॉग पर आपकी टिप्पणियां मेरी धरोहर हैं. वाली जी से मिलने का अवसर आपको मिला इसके लिए बधाई. अभी अभी ही आँखों का ओपरेशन हुआ है अतः विस्तार से कुछ नहीं लिख पा रहा हूँ.
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