६.युवा लोकप्रिय फिल्मी गायक-मनो
मेरे मित्र रामकी ने १९८७ अक्टूबर में विजया वाहिनी स्टूडियो में अपने हम उम्र सुन्दर,स्मार्ट और हसमुख व्यक्ति से मेरा परिचय कराते हुए कहा था यह मनो है बहुत सुन्दर गाते हैं मेरे दोस्त हैं और मनो को मेरा परिचय देते हुए बताया था की मैं बिहार का हूँ और बिहार में मिथिला पुरी का हूँ बहुत अच्छा हिंदी का विद्वान हूँ और अच्छा गीत लिखता हूँ.मैंने रामकी की बनाई धुन पर एक गीत लिखा था जिसके कारण रामकी बहुत प्रभावित था.मनो ने काफी अपनेपन के साथ मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया था और मैं उसके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुआ था.रामकी ने बताया की मनो ने पिछले वर्ष पहला हिट गीत कन्नड़ फिल्म के लिए गाया है और पार्श्व गायन के क्षेत्र में अभी अभी तेजी से उभरा है.रामकी भी कुछ धुन उस समय के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक एल.वैद्यनाथन(हिंदी सीरियल मालगुडी डेज़ के संगीत निर्देशक) के साथ मिल कर बनाया था और फिल्म में जमने के लिए संघर्षरत था.बाद में दूरदर्शन पर नया वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सहभागी के रूप में मनो को देख कर ख़ुशी हुई.उसने हिंदी फिल्मी गीत भी गाये हैं.
ईश्वर करुण,
चेन्नई.

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