३.टी वी पर हिंदी कविता के समर्थ प्रस्तोता-श्री सुभाष काबरा
सुभाष काबरा जी को टी वी पर चर्चित कवि सम्मलेन "वाह-वाह" में देखा था. श्री अशोक चक्रधर जी के बाद वे वाह-वाह के संचालक बने थे.उनके छोटे छोटे हास्य पूर्ण वाक्य एक अलग खासियत लिए हुए थे और श्रोताओं को प्रभावित करने में सक्षम थे.अभी अभी पिछले दिनों उनसे मिलने और साथ साथ काव्य पाठ का अवसर मिला वे आगे बढ़ कर बड़ी आत्मीयता से मिले और लगभग १० बजे दिन से सायं ७ बजे तक अपनी छोटी छोटी हास्युक्तिओं और व्यंगयुक्तिओं से हम सब को हँसाते और प्रभावित करते रहे.बड़ी अंतरंगता से हमारी बातचीत होती रही.शाम को कवि सम्मलेन का बहुत अच्छा संचालन तो किया ही शुद्ध हास्य और व्यंग की कविता सुना कर कवि सम्मलेन को सार्थक बनाया.मेरे गीतों के वे प्रशंसक हैं और उन्होंने मेरे गीतों को और मुझे भी बहुत सराहा.यह भेंट अविस्मरणीय है.उनकी पुस्तक "पढो समझो और मत मानो" से ही लिया गया उनका परिचय."५५ की उम्र तक ३०० रेडियो प्रोग्राम,३००० कवि सम्मलेन,धारावाहिकों के ३००० एपिसोड,४ टेली फिल्म्स,५ देशों की काव्य यात्राएं,४ कैसेट,एकाध किताब,यहाँ-वहां,जाने कहाँ कहाँ छपने का शगल,३०० शाल-श्रीफल,कुछ पुरस्कार सम्मान,२ बच्चे,१ बीबी,बहु,दामाद,अमूमन पाए जाने वाले सभी रिश्तेदार,और सबसे ऊपर माँ का आशीर्वाद,२-३ टेलीफ़ोन,१ फैक्स मशीन,बैंक के लोन पर घर और कार,और चलाना न जानते हुए भी एक कंप्यूटर.कंप्यूटर के पास वही पुराणी कलम और कोरे कागज़.रिटायरमेंट की कविता अभी नहीं लिखी.फिलहाल जेमिनी स्टूडियो में क्रिएटिव हेड.इतना परिचय काफी है ना ? कम लगे तो सीधे यहाँ संपर्क करें-kforkabra@gmail.com."
श्री सुभाष काबरा ने उपरोक्त पुस्तक २७.९.११ को मुझे भेंट देते हुए उस पुस्तक में,मेरे बारे में लिखा-"करुण भाई,ये किताब एक रोज़ कहीं खो जाएगी लेकिन आपके गीत युगों-युगों तक रहेंगे.आपकी विधा को सप्रणाम-ये प्रयास."
ईश्वर करुण,
चेन्नई.

No comments:
Post a Comment