Wednesday, 12 October 2011

LOG-JINSE MEIN MILA 8

८.स्टार बल्लेबाज़ और भारत के सफल कप्तान-के.श्रीकांत 
१९९०-९१ में कृष्णामचारी श्रीकांत भारत के स्टार बल्लेबाज़ भरोसेमंद ओपनर और सफल कप्तान के रूप में बहुत प्रसिद्ध थे.उनसे मिलना प्रत्येक भारतीय के लिए एक सपना था.मैं तब चेन्नई में नया-नया ही था लेकिन हिंदी विद्वान के रूप में जाना जानने लगा था.मेरे मित्र श्री किशोरे कुमार कौशल स्टेट  ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन में हिंदी अनुवादक थे और कवि के रूप में मेरे द्वारा प्रकाशित हस्तलिखित पत्रिका "कागज़" में प्रकाशित हो चुके थे.उनका सन्देश मिला की उनके कार्यालय द्वारा आयोजित हिंदी दिवस समारोह में मुझे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होना है.मुझे बहुत ख़ुशी हुई.फिर उन्होंने बताया की उस समारोह के मुख्य अतिथि के.श्रीकांत होंगे,मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा.दरअसल  स्टेट  ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन चेन्नई के तत्कालीन कार्यालय प्रधान की के.श्रीकांत से अच्छी मित्रता थी इसी कारण श्रीकांत की सहमति हिंदी दिवस समारोह के लिए मिली थी.उस समारोह में श्रीकांत के साथ मेरा परिचय किशोर कुमार कौशल जी ने कराया.श्रीकांत के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर बैठना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी और मेरे जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है.समारोह में हम दोनों को सम्मानित किया गया और हम दोनों नें संक्षिप्त भाषण भी दिया.फिर कार्यालय प्रधान ने उन्हें बड़े चुपके से विदा कर दिया अन्यथा बड़ी भीड़ जुट जाती.शायद चेन्नई में हिंदी कार्यक्रमों में के.श्रीकांत की यह अभी तक की एक मात्र सहभागिता है.जिन मित्रों को यह समाचार मिला,उन्होंने मुझे बधाई दी और चेन्नई के हिंदी जगत में के.श्रीकांत के साथ समारोह में होने के कारण मेरा कद भी थोडा बढ़ गया.
                 अभी पिछले दिनों जब मैं दिल्ली स्थित हिंदी भवन में अखिल भारतीय हिंदी कवि सम्मलेन कार्यक्रम में गया तो लगभग २१ वर्षों बाद श्री किशोर कुमार कौशल से भेंट हुई.वे अभी स्टेट  ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के दिल्ली कार्यालय में राजभाषा प्रबंधक हैं.वे विशेष रूप से मुझसे और प्रह्लाद श्रीमाली जी से मिलने आये थे.हमारे प्रति उनके स्नेह का यह आलम था कि वे अपने सुपुत्र को भी मिलवाने ले आये थे.हालाकि वे अपने कार्यालय के हिंदी कार्यक्रम के कारण बहुत व्यस्त थे.दूसरे उनका घर भी दिल्ली से दूर हरियाणा के एक गाँव में है,जहाँ पहुचने में भी दिल्ली से काफी समय लगता है.आज वे स्थापित कवि हैं और उन्होंने अपनी पहली कविता पुस्तक की प्रति भी मुझे दी.वहीँ उस आयोजन में मेरे गुड्डू जी (दलसिंगसराय) भी मिले जो श्रीकांत वाले हिंदी आयोजन के समय चेन्नई आए हुए थे और बिहार जा कर अपने परिचितों को ईश्वर भैया के रुतवे को बताते हुए लोगों को बड़ी शान से बताया करते थे कि ईश्वर भैया श्रीकांत के साथ समारोह के विशिष्ट अतिथि थे.यदा-कदा चेन्नई में श्रीकांत को रायल अंदाज़ में सिगार पीते हुए,कार में जाते हुए देख लेता हूँ तो पुरानी स्मृतिया ताज़ा हो जाती हैं.



ईश्वर करुण,
चेन्नई.

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