Tuesday, 25 October 2011

DEEP SE DOSTI

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.
दीप से जिसकी दोस्ती होगी,
उसके ही दिल में रौशनी होगी.
"ख़त्म कर देंगे अँधेरे को" सोचने की जगह,
उसके घर में ही उसे देनी पटखनी होगी. 
झोपडी तेरे दम पे रोशन कर,
छाती तेरी तभी तनी होगी.
दीप जितना जलाओगे ईश्वर,
धरती भी उतनी ही धनी होगी.
  • ईश्वर करुण,चेन्नई.

Thursday, 13 October 2011

LOG-JINSE MEIN MILA 9

९.मधुर गीतों के रचैता-वाली 

अभी-अभी तमिल फिल्मी गीतों में अपनी ख़ास मधुरता के लिए प्रसिद्ध वाली को काव्य क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए १ लाख रुपय का पुरस्कार मिला है.तमिल फिल्मी गीतों में एम् जी आर की लोकप्रियता में वाली के गीतों का भी योगदान है और वर्तमान में वे वरिष्ठ गीतकार हैं और फिल्मों के लिए लिखते रहे हैं.कुझे उनसे मिलने और बात करने का सौभाग्य श्री ते एस के कन्नन जो हिंदी तमिल संस्कृत से अच्छे विद्वान हैं,के द्वारा आयोजित हिंदी तमिल मधुर मिलन समारोह,चेन्नई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कविता सम्मलेन सहित एक-दो आयोजनों में हुआ.उनके संभ्रांत व्यवहार परिधान,देदीप्यमान चेहरा,उसपर सिन्दूर का तिलक और लम्बी खिचड़ी दाढ़ी,उन्हें गरिमा प्रदान करते हैं.मेरा परिचय उनसे हिंदी कवी के रूप में कराया गया.टुकड़ों-टुकड़ों में उनसे तमिल समकालीन कविता पर चर्चा भी हुई.आगे चल कर ज्यात हुआ की वे श्रीरंगम के हैं और वाली मित्रों के द्वारा दिया गया नाम है.वाली याने रामायण के पात्र बाली-सुग्रीव वाले बाली जो तमिल उचारण में वाली है.अमूमन हिंदी में बाली नाम नहीं के बराबर है शायद भगवान् राम के विरोधी होने के कारण रावण,कुम्भकरण,बाली,अहिरावन आदि नाम हिंदी क्षेत्र में नहीं मिलते हैं.यह नाम मित्रों ने वाली के गुणों को देखते हुए उसपर रिदम बिठाते हुए उन्हें दे दिया.वाली के प्रति मेरे मन में जिस विशेष कारण से लगाओ है वह है उन्होंने भी त्रिची से पहले पहल तमिल में हस्तलिखित पत्रिका प्रकाशित किया था और संवेदना के इसी धराधर पर मैं उनसे विशेष जुडाव महसूस करता हूँ क्योंकि चेन्नई से मैंने भी पहले पहल हस्तलिखित पत्रिका कागज़ का प्रकाशन किया था.मुझा भी तमिलनाडु में जो थोड़ी बहुत प्रसिद्धि मिली वह भी जीतों के कारण ही.हालाकि वाली हिंदी जानने वालों के बीच उतने जानेजाते नहीं हैं जितना की जाना जाना चाहिए.उनके अद्भुत सबध संयोजन कोमल भाव और ताजगी भरे उपमान अदभुत हैं.अभी तमिल में उनके जीवन पे आधारित सीरियल काफी लोकप्रिय हुआ है.पुरस्कार पर कागज़ परिवार की बधाई.


ईश्वर करुण,
चेन्नई.        

Wednesday, 12 October 2011

LOG-JINSE MEIN MILA 8

८.स्टार बल्लेबाज़ और भारत के सफल कप्तान-के.श्रीकांत 
१९९०-९१ में कृष्णामचारी श्रीकांत भारत के स्टार बल्लेबाज़ भरोसेमंद ओपनर और सफल कप्तान के रूप में बहुत प्रसिद्ध थे.उनसे मिलना प्रत्येक भारतीय के लिए एक सपना था.मैं तब चेन्नई में नया-नया ही था लेकिन हिंदी विद्वान के रूप में जाना जानने लगा था.मेरे मित्र श्री किशोरे कुमार कौशल स्टेट  ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन में हिंदी अनुवादक थे और कवि के रूप में मेरे द्वारा प्रकाशित हस्तलिखित पत्रिका "कागज़" में प्रकाशित हो चुके थे.उनका सन्देश मिला की उनके कार्यालय द्वारा आयोजित हिंदी दिवस समारोह में मुझे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होना है.मुझे बहुत ख़ुशी हुई.फिर उन्होंने बताया की उस समारोह के मुख्य अतिथि के.श्रीकांत होंगे,मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा.दरअसल  स्टेट  ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन चेन्नई के तत्कालीन कार्यालय प्रधान की के.श्रीकांत से अच्छी मित्रता थी इसी कारण श्रीकांत की सहमति हिंदी दिवस समारोह के लिए मिली थी.उस समारोह में श्रीकांत के साथ मेरा परिचय किशोर कुमार कौशल जी ने कराया.श्रीकांत के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर बैठना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी और मेरे जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि है.समारोह में हम दोनों को सम्मानित किया गया और हम दोनों नें संक्षिप्त भाषण भी दिया.फिर कार्यालय प्रधान ने उन्हें बड़े चुपके से विदा कर दिया अन्यथा बड़ी भीड़ जुट जाती.शायद चेन्नई में हिंदी कार्यक्रमों में के.श्रीकांत की यह अभी तक की एक मात्र सहभागिता है.जिन मित्रों को यह समाचार मिला,उन्होंने मुझे बधाई दी और चेन्नई के हिंदी जगत में के.श्रीकांत के साथ समारोह में होने के कारण मेरा कद भी थोडा बढ़ गया.
                 अभी पिछले दिनों जब मैं दिल्ली स्थित हिंदी भवन में अखिल भारतीय हिंदी कवि सम्मलेन कार्यक्रम में गया तो लगभग २१ वर्षों बाद श्री किशोर कुमार कौशल से भेंट हुई.वे अभी स्टेट  ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के दिल्ली कार्यालय में राजभाषा प्रबंधक हैं.वे विशेष रूप से मुझसे और प्रह्लाद श्रीमाली जी से मिलने आये थे.हमारे प्रति उनके स्नेह का यह आलम था कि वे अपने सुपुत्र को भी मिलवाने ले आये थे.हालाकि वे अपने कार्यालय के हिंदी कार्यक्रम के कारण बहुत व्यस्त थे.दूसरे उनका घर भी दिल्ली से दूर हरियाणा के एक गाँव में है,जहाँ पहुचने में भी दिल्ली से काफी समय लगता है.आज वे स्थापित कवि हैं और उन्होंने अपनी पहली कविता पुस्तक की प्रति भी मुझे दी.वहीँ उस आयोजन में मेरे गुड्डू जी (दलसिंगसराय) भी मिले जो श्रीकांत वाले हिंदी आयोजन के समय चेन्नई आए हुए थे और बिहार जा कर अपने परिचितों को ईश्वर भैया के रुतवे को बताते हुए लोगों को बड़ी शान से बताया करते थे कि ईश्वर भैया श्रीकांत के साथ समारोह के विशिष्ट अतिथि थे.यदा-कदा चेन्नई में श्रीकांत को रायल अंदाज़ में सिगार पीते हुए,कार में जाते हुए देख लेता हूँ तो पुरानी स्मृतिया ताज़ा हो जाती हैं.



ईश्वर करुण,
चेन्नई.

ALVIDA JAGJEET !

अलविदा जगजीत!
अंततः रेशमी आवाज़ के धनी और ग़ज़ल के शब्दों को जीता जागता सांस लेता बनाने वाले ग़ज़ल की दुनिया के सदाबहार कलाकार जगजीत सिंह इस फानी दुनिया को अलविदा कह गए.अभी-अभी "लोग:जिनसे मैं मिला" कालम का आरम्भ,मैंने उनसे ही किया था;प्रार्थना भी की थी कि मौला उनकी उम्र लम्बी करें.लेकिन 'मोहल्ले की सबसे पुरानी निशानी,वो बुढिया जिसे लोग कहते थे नानी' की तरह लम्बी उम्र के हक़दार नहीं हो पाए.शायद खुदा उन्हें अपने सामने बिठा कर उनसे ग़ज़ल सुनना चाहता था.लगता है जगजीत का मन भी इस दुनिया से भर गया था ! प्यार का खुशनुमा एहसास अपनी ग़ज़लों से करोड़ों लोगों को कराने वाले जगजीत खुदा से खुद प्यार कर बैठे और सचमुच खुदा को प्यारे हो गए.
         जब मैंने हस्तलिखित पत्रिका के नाम के बारे में सोचा था तो मेरे मन में "कागज़" और "कागद" दो नाम उभरे थे.एक में अतीत को वर्तमान के रास्ते होते हुए भविष्य तक ढोने वाला "कागज़" था,तो दुसरे में कबीर के फक्करी  अंदाज़ में धरती को कागद समझने वाला सूफियाना "कागद" था.....और मैंने कागज़ चुना इस चुनाव के पीछे मेरे अवचेतन मन में जगजीत का गाया,"वो कागज़ की कश्ती,वो बारिश का पानी"का कागज़ भी था और थोडा बहुत किशोर का गाया "मेरा जीवन कोरा कागज़" वाला कागज़ भी.अपने अंदाज़ में जिस कागज़ को मैंने समझा उसपर लिखा मेरा ये शेर मेरी बात कह जाता है-"कुछ संदली एहसास भर उधार लिया है,कहते हैं लोग मैंने तुम्हें प्यार किया है.......कागज़ की हकीकत को कलम से बदल दिया,"ईश्वर" ने ग़ज़ल इस तरह तैयार किया है".आज भी 'कागज़ की कश्ती' सुनते ही मैं 'कागज़' से जुड़ जाता हूँ....जगजीत से जुड़ जाता हूँ.इस तरह मैं तमाम उम्र जगजीत की याद करता रहूँगा क्योंकि मैं अपने हाथों से सजाये-सँवारे हस्तलिखित पत्रिका कागज़ को अपने वजूद का एक हिस्सा मानता हूँ."कागज़" परिवार की तरफ से जगजीत को श्रधांजलि.


ईश्वर करुण,
चेन्नई.

KAGAZ KA DWITIYA ANK











कागज़ के प्रथम अंक और दुसरे अंक को प्रयास अंक के रूप में निकाला गया था.एवं इसका मूल्य "स्वेछया" रखा गया था.इसके स्तम्भ का नामकरण बदले कलेवर में,नै कलम से आदि रखा गया था.  

Saturday, 8 October 2011

LOG-JINSE MEIN MILA 7

७.CHARTERED ACCOUNTANT से सफल फिल्म संगीतकार-भरद्वाज
१९९७ में मेरे मित्र डॉ.बशीर ने बताया की आज शाम हमें फिल्म संगीतकार भारद्वाज जी से मिलने उनके घर जाना है.डॉ.बशीर वर्ष १९८९ से मेरे परम मित्र हैं और बहुत सारी फिल्मी हस्तिओं से हम दोनों साथ साथ मिले डॉ.बशीर वैसे तो तेलुगु भाषी हैं लेकिन तमिल,उर्दू,हिंदी और अंग्रेजी के अच्छे विद्वान हैं और बहुत अच्छे कवि भी.मैं डॉ.बशीर के साथ शाम को जब मैं भरद्वाज जी से मिला तो एक पल के लिए यह सोच भी नहीं पाया कि वे हिंदीतर भाषी हैं.नाम हिंदी क्षेत्र का,चेहरा मोहरा उत्तर भारतीय और उर्दू हिंदी मिश्रित बोलने का लहजा.वे ग़ज़ल पसंद करते हैं शेरो-शायरी के शौकीन हैं.जब यह मालुम हुआ कि वे सी.ए हैं.....और आश्चर्य......और ऊपर से मालुम हुआ कि संगीत निर्देशक हैं तो महा आश्चर्य.उन्होंने बड़ी आत्मीयता से हमें चाय पिलाया,कुछ शेर सुनाये कुछ शेर हम लोगों से सुने.मिलते रहने को कहा.१९९८ में जब उनकी पहली तमिल फिल्म "कादल मन्नन"   का प्रीव्यू  शो आयोजित हुआ तो मुझे और डॉ.बशीर को भी आमंत्रित किया.आगे चल कर उनका हिट गीत "ओ पोड"   लोगों की जुबां पर चढ़ गया.आज वे सफल संगीतकार हैं.

ईश्वर करुण,
चेन्नई.