Monday, 19 September 2011

KAGAZ KE BAARE MEIN

कागज़ चेन्नई से १९८९ से निकलने वाली उल्लेखनीय हस्तलिखित पत्रिका थी.इसके माध्यम से कई साहित्यकार साहित्य जगत में आये और आज भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं.श्री प्रह्लाद श्रीमाली,डॉ.निर्मला मौर्य,डॉ.प्रभु गंजिहाल आदि प्रमुख हैं.कागज़ के अंकों पर नवभारत टाइम्स ने बड़ी समीक्षा छापी.कागज़ का महत्त्वपूर्ण उल्लेख दक्षिण की हिंदी पत्रकारिता पर किए गए शोध कार्यों में हुआ.जिसमे डॉ.रविन्द्र,गोवा,डॉ.जयशंकर बाबु का नाम उल्लेखनीय है.कागज़ के चाहने वालों में दक्षिण के प्रसिद्ध हिंदी विद्वान डॉ.सुब्रमण्यम विष्णुप्रिया,श्री.र.शौरिराजन,स्व.रुक्माजीराव अमर,डॉ.बालशौरी रेड्डी आदि प्रमुख रहे हैं.लगभग २३ वर्षों बाद कागज़ को पुनर्जीवित करने का प्रयास है.चेन्नई और देश के अन्य शहरों के मित्रों से,जिन्होंने कागज़ को देखा-पढ़ा,निवेदन है कि वे अपने संस्मरण या विचार भेजें.साथ ही अपनी छोटी छोटी रचनाएँ भी भेजें.


ईश्वर करुण,
चेन्नई. 

1 comment:

  1. Sir...this is is really excellent information...i need your help in this regard...Iam doing a research project on "Tamilnadu mein HIndi patrakaritha kaa udbhav aur vikas" It seems a lot of material is with you...Kindly accept my request..yours faithfully
    D. Nageswara Rao,
    scsvmv University, Kanchipuram.631561

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